तो भइया! दक्षिण में आम पक चुके हैं, तुम उत्तर वाले करो मई-जून का इंतजार। लाल टोकरी वाला है हिमायत आम और नीली टोकरी में है बंगनपल्ली। दोनों ही किस्में साउथ में आमों के राजा हैं. तेलगु में पल्ली छोटे गांवों को संबोधित करने के लिए लगाया जाता है.
इस हिसाब से बंगनपल्ली वो छोटा सा गांव या इलाका हुआ, जहां से ये आम की प्रजाति निकली। यह जगह आंध्र प्रदेश के नंदयाल जिले में पड़ती है. क्या गजब का स्वाद है भाई. एकदम कसूता। हमने तो मकर संक्राति पर चख भी लिया!
हिमायत का भी किस्सा दिलचस्प है. बताते हैं कि मूलरूप से यह तमिलनाडु की पैदावार है. एक बार कहीं से मुगल बादशाह हुमायूं के दरबार में पहुंचा तो बादशाह और उनकी बेगमों को इसकी दिलकश सुगंध और स्वाद ऐसा चढ़ा कि एक नाम हुमायूं पसंद भी रख दिया गया.
हैदराबाद के निजामों-नवाबों को भी खूब भाया यह हिमायत। आंध्र प्रदेश में महबूबनगर के आसपास के जिलों में इसकी बागवानी होने लगी. अब यह जिला तेलंगाना में है पर 2014 से पहले तक सब आंध्र ही था.
अब बात आम हो चली तो यह भी जान लीजिए कि दुनिया के 100 से अधिक देशों में आम की बागवानी होती है. चीन, थाईलैंड, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, मैक्सिको जैसे देश आम उत्पादन में खास स्थान रखते हैं.
भारत तो खैर आम महाशक्ति है. दुनिया के कुल मैंगो प्रोडक्शन का 50 फीसदी तो यहीं होता है. अपने देश में लोकल से लेकर एक्सपोर्ट क्वालिटी की तकरीबन 1500 से अधिक किस्में हैं.
2023-24 में भारत ने 32. 000 मीट्रिक टन आम निर्यात किया। इसकी कुल रकम बनी लगभग 60.14 मिलियन डाॅलर यानी कि 54.34 अरब रुपए। शायद इसी को कहते हैं आम के आम गुठलियों के दाम. देश के अलग-अलग राज्यों की आम की अपनी एक खास किस्म है.
मसलन यूपी का दशहरी, लंगड़ा, चौसा(बिहार-हरियाणा), अल्फांसो(महाराष्ट्र), केसर(गुजरात), हिमसागर और मालदा(पश्चिम बंगाल), तोतोपुरी(तमिलनाडु-कर्नाटक), नीलम(आंध्र) प्रमुख रूप से हैं.
आम्रपाली और मल्लिका जैसी हाईब्रिड किस्में भी काफी स्वादिष्ट होती हैं. ये दोनों उत्तर की दशहरी और दक्षिण की नीलम के मिश्रण हैं. बताते चलें कि कर्नाटक के श्रीनिवासपुर को भारत का मैंगो सिटी कहा जाता है. कोलार जिले के इस इलाके में करीब-करीब 63 किस्में के आम होते हैं.




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